शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। नई शिक्षा व्यवस्था को लागू करने की दिशा में अहम कदम उठाते हुए 1 वर्ष का बी.एड कोर्स 2026-27 शैक्षणिक सत्र से फिर शुरू किया जा रहा है। यह बदलाव 2014 से लागू दो वर्षीय अनिवार्य बी.एड संरचना में संशोधन के रूप में देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य योग्य और विषय विशेषज्ञ उम्मीदवारों को कम समय में प्रशिक्षित कर शिक्षा व्यवस्था में शामिल करना है, ताकि स्कूलों में शिक्षक रिक्तियों को तेजी से भरा जा सके।
National Council for Teacher Education ने जारी की नई रूपरेखा
राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) ने 2025-26 के दौरान जारी मसौदा नियमों में स्पष्ट किया कि 2026-27 से 1 वर्षीय बी.एड और एम.एड को पुनः लागू किया जाएगा। परिषद के अनुसार यह कोर्स उन अभ्यर्थियों के लिए होगा जिनके पास पहले से मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि है। यह कदम शिक्षक प्रशिक्षण को अधिक लचीला और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में उठाया गया है। अनुमान है कि पहला बैच 2027 में कोर्स पूरा करेगा और इसके बाद शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में शामिल हो सकेगा।
पात्रता मानदंड में किया गया बड़ा बदलाव
नए प्रावधानों के अनुसार सभी स्नातक इस कोर्स के लिए पात्र नहीं होंगे। जिन अभ्यर्थियों ने चार वर्षीय अंडरग्रेजुएट डिग्री पूरी की है या जिन्होंने किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन न्यूनतम निर्धारित अंकों के साथ उत्तीर्ण किया है, वे 1 वर्ष के बी.एड के लिए आवेदन कर सकेंगे। तीन वर्षीय पारंपरिक स्नातक डिग्री धारकों के लिए दो वर्षीय बी.एड व्यवस्था जारी रहेगी। यह व्यवस्था इस उद्देश्य से बनाई गई है कि प्रवेश लेने वाले उम्मीदवार अपने विषय में पहले से दक्ष हों।
शिक्षक कमी दूर करने की रणनीति का हिस्सा
देशभर में सरकारी और निजी स्कूलों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी लंबे समय से चर्चा में रही है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि एक वर्षीय बी.एड कोर्स से प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ेगी और भर्ती प्रक्रिया में तेजी आएगी। इससे उच्च कक्षाओं में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, नई शिक्षा नीति के अनुरूप लचीली और बहु-प्रवेश-निकास प्रणाली को भी बल मिलेगा।
पाठ्यक्रम में व्यावहारिक प्रशिक्षण पर रहेगा फोकस
नए सिलेबस को इस प्रकार तैयार किया गया है कि कम समय में अधिक प्रभावी प्रशिक्षण दिया जा सके। शिक्षा मनोविज्ञान, आधुनिक शिक्षण पद्धतियां, डिजिटल और स्मार्ट क्लासरूम तकनीक, मूल्यांकन प्रणाली और समावेशी शिक्षा जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। स्कूल इंटर्नशिप और प्रायोगिक प्रशिक्षण को अनिवार्य बनाया गया है ताकि अभ्यर्थी वास्तविक कक्षा अनुभव प्राप्त कर सकें। इस संरचना का लक्ष्य थ्योरी के बजाय व्यवहारिक दक्षता को प्राथमिकता देना है।
प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रवेश परीक्षा की भूमिका
1 वर्षीय बी.एड में प्रवेश राज्य स्तरीय या राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं के माध्यम से होगा। कई राज्यों में प्री-टीचर एजुकेशन टेस्ट या केंद्रीय स्तर की परीक्षा आयोजित की जा सकती है। विश्वविद्यालयों और मान्यता प्राप्त संस्थानों द्वारा जल्द आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाएगी। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे केवल NCTE से मान्यता प्राप्त कॉलेजों में ही आवेदन करें, ताकि डिग्री की वैधता पर कोई प्रश्न न उठे।
क्या दो वर्षीय बी.एड अब भी मान्य रहेगा
शिक्षा परिषद ने स्पष्ट किया है कि दो वर्षीय बी.एड को समाप्त नहीं किया जा रहा है। तीन वर्षीय स्नातक धारकों के लिए यह कोर्स जारी रहेगा। वहीं बारहवीं के बाद चार वर्षीय इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम भी लागू रहेगा। इस प्रकार शिक्षा प्रणाली में समानांतर विकल्प उपलब्ध रहेंगे, ताकि विभिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमि के विद्यार्थी अपने अनुसार मार्ग चुन सकें।
आधिकारिक सूचना पर रखें नजर, नियमों में बदलाव संभव
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतिम नियम और विस्तृत दिशा-निर्देश आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे। अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे समय-समय पर NCTE और संबंधित विश्वविद्यालयों की आधिकारिक वेबसाइट पर अपडेट देखते रहें। पात्रता, फीस संरचना और प्रवेश प्रक्रिया में परिवर्तन संभव है, इसलिए आवेदन से पहले नवीनतम दिशा-निर्देश अवश्य जांचें।
यह फैसला शिक्षक शिक्षा प्रणाली में बड़ा संरचनात्मक बदलाव माना जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में शिक्षा क्षेत्र की दिशा तय कर सकता है।
